Apr 8 • 5M

Twins differ from each other, WHY? जुड़वा बच्चे अलग क्यों होते हैं?

An Astrological Analysis on what makes twins different

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Anish Prasad
The Podcast is about the monthly article that is published on this Substack. Listening to the subject matter of the article gives a different perspective of that topic 😊
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This Podcast 🔊 is primarily in Hindi Language 🍁 यह पॉडकास्ट मुख्य रूप से हिंदी भाषा में है 🍁
The image is part of the article titled Twins differ from each other, WHY? जुड़वा बच्चे अलग क्यों होते हैं? Two kids in silhouette are shown surrounded by nine planets. The article including podcast is published at rationalastro.org by Anish Prasad
इस आर्टिकल को हिन्दी में पढ़ने के लिए कृपया नीचे स्क्रॉल करें 👇

Nirayan Jyotish or the Vedic Astrology is the only system that can explain why twins differ. Twins are never born exactly on the same Hour: Min: Sec. There is always a gap of few seconds to few minutes between the births of twins. This is nature's way that no one in the world can challenge. Subtle difference in birth time of twins explains why identical twins are different. Let us understand this further.

The Importance of Varga Chakras or Divisional Charts in explaining why twins differ:-

Many people question that if Astrology is real why are twins different? In any horoscope, there are several divisional charts apart from the main rasi chart. These divisional charts are also known as Varga Chakras. There are clear defined rules given in classics for constructing these Varga chakras.

One of the Varga chakras is D-60 called as Shashtiamsa. We divide a rasi into 60 parts and plot on a fresh rasi chart based on certain rules to construct D-60 chart. In a rasi chart, Lagna or Ascendant generally remains in a rasi for about two hours. When we make 60 divisions of rasi for constructing a D-60 chart, we see that lagna in D-60 changes in about two minutes. Through D-60 chart, we can examine the previous births and balance of karmas of a person. The balance of karmas shape our current life. For example: Ketu exalted in the third house of D-60 indicates 'Jala-Maran' in previous lives. Jala-Maran is death due to water. If this is so, in the current life, the person would likely be suffering from a varying degree of Hydrophobia.

Twins are born ‘nearly’ on the same time but not ‘exactly’ on the same time.

Twins would be similar in physical features and various other attributes. This is because their rasi chart would be similar. But, higher divisional charts viz. D-60 and D-150 (Nadiamsa) would be completely different. The twins are born 'nearly' on the same time but not 'exactly' on the same time. Thus, their planetary strengths, avasthas etc are also different from each other. This explains why twins differ in heights and sizes. The different higher divisional charts also explains why are twins personalities different.

Do Twins have same horoscope?

Horoscope does not mean only the Rasi chart. It also includes several divisional charts. As explained above, the higher divisional charts viz. Shashtiamsa (D-60) and Nadiamsa (D-150) differ in case of twins. Thus, twins DO NOT have same horoscope. In case lagna is on a cusp of two signs, it is possible to even have different rasi charts in the case of twins. This is the reason why do some twins look completely different. In such cases, the twins can also have different moon signs as well as sun signs. Of course, this depends on various planetary configurations on a case-to-case basis.

The Karma theory explanation:

Here, the Karma theory also kicks in. Since the balance of karmas and their fruits differ, this result in differing world view. Thus, the decisions and actions of the twins differ in different situations.

There are methods of predicting twins in Astrology. But we will discuss this in some other article. In this article, we have confined ourselves to the aspect of how and why twins are so different.

Conclusion:

The Nirayan Jyotish system considers Lagna and divisional charts as crucial. While the Sayan system (western astrology) doesn't give importance to these concepts. That is why ours is the only astrological system that can explain why twins are different.


🙏 Om Tat Sat 🙏

Anish Prasad


The image has logo of RationalAstro with its name. A phrase is mentioned "Astrology is much more than predicting future. It is about making the future possible." Articles contributed by: Anish Prasad

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जुड़वा बच्चे अलग क्यों होते हैं?

निरायन ज्योतिष या वैदिक ज्योतिष एकमात्र प्रणाली है जो बता सकती है कि जुड़वाँ बच्चे क्यों भिन्न होते हैं।जुड़वाँ कभी भी एक ही समय पर पैदा नहीं होते हैं। जुड़वा बच्चों के जन्म के बीच हमेशा कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों का अंतर होता है। यह प्रकृति का ऐसा तरीका है जिसे दुनिया में कोई चुनौती नहीं दे सकता। जुड़वां बच्चों के जन्म के समय में यह सूक्ष्म अंतर ही कारण है कि जुड़वां बच्चे अलग क्यों होते हैं। आइए इसे और समझते हैं।

जुड़वाँ बच्चों के भिन्न होने में वर्ग चक्रों का महत्व: -

बहुत से लोग सवाल करते हैं कि अगर ज्योतिष वास्तविक है तो जुड़वां बच्चों का जीवन अलग क्यों हैं? किसी भी कुण्डली में संभागीय चक्र या वर्ग चक्रों का बहुत महत्तव है। इन वर्ग चक्रों को कैसे बनाया जाता है उसके लिए ऋषियों ने स्पष्ट परिभाषित नियम दिए हैं।

वर्ग चक्रों में से एक डी-60 है जिसे षष्ठीआंश कहा जाता है। हम एक राशी को 60 भागों में विभाजित करते हैं और डी-60 चार्ट बनाने के लिए कुछ नियमों के आधार पर एक नए राशी चार्ट पर प्लॉट करते हैं। मुख्य राशी चार्ट में लग्न आम तौर पर लगभग दो घंटे तक एक राशी में रहता है। जब हम D-60 चार्ट बनाने के लिए राशी के 60 भाग बनाते हैं, तो D-60 की एक राशी में लग्न लगभग दो मिनट ही रह पाता है। D-60 चार्ट के माध्यम से हम किसी व्यक्ति के पिछले जन्मों और कर्मों के हिसाब किताब की जांच कर सकते हैं। पिछले जन्मों के कर्म हमारे वर्तमान जीवन को आकार देते हैं। उदाहरण के लिए: डी-60 के तीसरे घर में उच्च का केतु पिछले जन्मों में 'जल-मरन' को इंगित करता है। जल-मरन यानि पानी से मौत। यदि ऐसा है, तो वर्तमान जीवन में, व्यक्ति संभवतः हाइड्रोफोबिया (पानी से डर) से पीड़ित होगा।

जुड़वां कुछ समय के अन्तर पर पैदा होते हैं, कभी भी एक ही समय पर नहीं

जुड़वां बच्चे शारीरिक विशेषताओं में समान होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनका राशी चक्र समान होगा। लेकिन, उच्च वर्ग चक्र जैसे D-60 और D-150 (नाड़ीअंश) पूरी तरह से अलग होंगे। जुड़वां हमेशा कुछ समय के अन्तर पर ही पैदा होते हैं। इस वजह से उनका ग्रह बल, ग्रहों की अवस्था आदि भी एक दूसरे से भिन्न होते हैं।

क्या जुड़वां बच्चों की कुंडली एक जैसी होती है?

राशिफल का मतलब केवल राशी चक्र ही नहीं होता है। इसमें कई वर्ग चक्र भी शामिल हैं। जुड़वा बच्चों के मामले में षष्ठीअंश (D-60) और नाड़ीअंश (D-150) अलग-अलग होते हैं। यदि राशी चक्र में भी लग्न अंतिम डिग्री और मिनट में है, तो जुड़वा बच्चों के मामले में अलग-अलग राशी चक्र भी हो सकते हैं। यही कारण है कि कुछ जुड़वां बिल्कुल अलग दिखते हैं।

कर्म सिद्धांत व्याख्या:

यहां, कर्म सिद्धांत भी लागू होता है। चूंकि पिछले जन्मों के कर्मों का फ़ल हर आत्मा का अलग है, इसलिए इसका परिणाम भी हर व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग होता है। इसी वजह से जुड़वा बच्चों के निर्णय और कार्य अलग-अलग स्थितियों में भिन्न होते हैं।

ज्योतिष में जुड़वाँ बच्चे कैसे पैदा होते हैं इसको भी जानने के तरीके हैं। लेकिन हम इस पर किसी अन्य लेख में चर्चा करेंगे। इस लेख में, हमने खुद को इस पहलू तक सीमित रखा है कि जुड़वाँ बच्चे कैसे और क्यों इतने अलग होते हैं।

निष्कर्ष:

निरायण ज्योतिष प्रणाली, लग्न और वर्ग चक्रों को बहुत महत्वपूर्ण मानती है। जबकि सायन प्रणाली (पश्चिमी ज्योतिष) इन अवधारणाओं को महत्व नहीं देती है। इसलिए केवल निरायण ज्योतिष प्रणाली ही यह बता सकती है कि जुड़वाँ बच्चे अलग क्यों होते हैं।


🙏 ऊँ तत् सत् 🙏

अनीश प्रसाद


 इस तस्वीर में रैशनलएस्ट्रो का लोगो दिखाया गया है। लिखा है “ज्योतिष भविष्यवाणी करने से कहीं अधिक है। यह भविष्य को संभव बनाने के बारे में है”. यह आर्टिकल रैशनलएस्ट्रो पर अनीश प्रसाद द्वारा लिखा गया है

रैशनलएस्ट्रो ज्योतिष के माध्यम से जीवन के प्रति सकारात्मक, तर्कसंगत और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का प्रचार करता है। 😊 कृपया परिवार से जुड़कर इसे शक्ति दें 🙏🏻

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