Podcasts 🔊
Holashtak 2022 / होलाष्टक २०२२

Holashtak 2022 / होलाष्टक २०२२

The eight auspicious days of Introspection and penance before Holi /तपस्या और आत्मनिरीक्षण के आठ पवित्र दिन

Listen Audio | ऑडियो सुनें 🔊

🥀 on SPOTIFY ⬇️

🥀 on APPLE Podcasts ⬇️

This Podcast 🔊 is primarily in Hindi Language 🍁 यह पॉडकास्ट मुख्य रूप से हिंदी भाषा में है 🍁
The image represents mix of colours that signifies Holi 2022. The eight days before Holi are called the Holashtak days. The word 'Holashtak' and 'होलाष्टक' is prominently written in the centre of the imgae. The image is part of the article titled 'holashtak' written by Anish Prasad and published at

👇 इस आर्टिकल को हिन्दी में पढ़ने के लिए कृपया नीचे स्क्रॉल करें 👇

Holashtak are the period of eight days culminating in Holi. We celebrate Holi on the Poornima of Phalgun month. Many Hindus believe that Holashtak days are inauspicious for doing many activities. But, in fact, these days are the days of penance and introspection.

Why is Holashtak considered inauspicious?

Holashtak are the eight days of phalgun month from Sukla Ashtami to Poornima. Holashtak is also called Holika Ashtak. Hindus believe that these eight days are not for taking up any auspicious activity. It is not clear why holashtak is considered inauspicious? It is surprising that even today in this era of modern science, this belief holds ground.

Holashtak days are not inauspicious but the days of penance and introspection.

There are two prominent stories surrounding Holika Ashtak. One of the stories says that Lord Shiva destroyed Kaamdev on Sukla Ashtami and the world was full of gloom. The entire World appeased Shiva, and on the day of Poornima, he granted life to Kamadeva. As a result, the World rejoiced in celebrations and colours.

There is another popular story. Hiranyakashyap detained Prahlad on Sukla Ashtami. Holika started making preparations for destroying Prahalad. But, on the eighth day of Poornima, she herself got destroyed. The World rejoiced in the form of Holi celebrations.

Astrologically speaking, these eight days are like any other days in our lives. These days can be notch better than normal days since they fall in the auspicious phalgun month. Therefore, in the absence of any concrete logic or reason, let us not brand these eight days as inauspicious. If we have to choose or take sides, let us choose the positive and not the negative. Phalguni is a pious month. It is an ideal time for self-improvement through inner drive and motivation.

Please do not consider Holashtak days as inauspicious. If we don’t want to take up any auspicious events due to strong beliefs, it is upto us. But this does not take away the piousness of the entire concept of Holashtak.

Holashtak Mantras:

'Rakshoghna Mantra' are the set of mantras prescribed during Holashtak period. These mantras counter the evil effects of planetary energies. As a result, they aid in the fulfillment of worldly desires. The Rigveda Mandala 4 and 10 and also Yajur Veda prescribe these Mantras.

When is Holashtak in 2022?

Every year, Holashtak 2022 start and end date is found from the Indian Calendar. In 2022, Holi falls on 18-March-2022. So, Holashtak 2022 starts from 10-March, 2:57 AM onwards and it ends on Holi which is on 18-March.

Let us examine the horoscope at the time of start of Holashtak. We see that these eight days are in the pratyantardasa of Saturn. Saturn is occupying its own house - the 2nd house. From here, it strongly aspects Pisces - the fourth house of Sukha. It also aspects Cancer- the 8th house of spiritual progress. And Libra- the 11th house of gains and relationships in our lives.

The image represents date, time, place and panchanga points on the start of Holashtak days. This is part of an article on Holashtak 2022 written by Anish Prasad and published at
The image represents an horoscope casted on the start of Holashtak days. This is part of an article on Holashtak 2022 written by Anish Prasad and published at

During Holashtak 2022 date, Saturn is in the Dhanishtha Nakshatra during this time. Let's welcome these holy days through the serene chants of Dhanishtha Nakshatra Sutram. It will be very auspicious to listen to the 21 chants of Dhanishta Nakshatra Sutram every day till Holi. Listening or chanting of mantras is very simple process. There are no complexities involved.

Let’s identify one weakness in our personality and contemplate over it. Let’s take a step in being a better version of ourselves and benefit the society and the World.

🙏 Om Tat Sat 🙏

Anish Prasad

The image has logo of RationalAstro with its name. A phrase is mentioned "Astrology is much more than predicting future. It is about making the future possible." Articles contributed by: Anish Prasad

RationalAstro propagates a positive, rational and spiritual outlook towards life through Astrology. 😊 Please JOIN and strengthen the RationalAstro Family 🙏🏻

होलाष्टक २०२२

होलाष्टक क्या होता है? होली पर समाप्त होने वाले आठ दिनों की अवधि को होलाष्टक माना जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को हम होली मनाते हैं। कई हिंदुओं का मानना है कि होलाष्टक के दिनों में कोई शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। ये कहते हैं कि होलाष्टक में वर्जित कार्य करने से अशुभ परिणाम हो सकते हैं। । लेकिन, असल में ये दिन तपस्या और आत्मनिरीक्षण के दिन हैं।

होलाष्टक को अशुभ क्यों माना जाता है? क्या होता है होलाष्टक में?

आपने सुना होगा कि होलाष्टक में वर्जित कार्य कई सारे बताये गये हैं जैसे नई गाड़ी लेना, नये मकान में रहना इत्यादि। कई सारे ऐसे काम हैं जो लोग मना करते हैं होलाष्टक में करने को। कई पंडितों का भी मानना है कि होलाष्टक में भूलकर भी ना करें ये काम। लेकिन क्या यह सोच ठीक है?

होलाष्टक शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक फाल्गुन मास के आठ दिन हैं। होलाष्टक को होलिका अष्टक भी कहा जाता है। हिंदुओं का मानना है कि ये आठ दिन कोई शुभ कार्य करने के लिए नहीं हैं। हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि होलाष्टक के दिनों को क्यों अशुभ माना जाता है? होलाष्टक में क्या करें क्या न करें इसके लिये कोई प्रामाणिक सूची नहीं है। आश्चर्य की बात यह है कि आधुनिक विज्ञान के इस युग में भी यह मान्यता आज भी कायम है।

होलाष्टक के दिन अशुभ नहीं बल्कि तपस्या और आत्मनिरीक्षण के दिन होते हैं।

होलिका अष्टक को लेकर दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं। एक कहानी में कहा गया है कि शुक्ल अष्टमी पर भगवान शिव ने कामदेव को नष्ट कर दिया और दुनिया निराशा से भर गई। पूरे विश्व ने शिव को प्रसन्न किया और फ़लस्वरूप पूर्णिमा के दिन उन्होंने कामदेव को जीवनदान दिया। इससे विश्व उत्सवों और रंगों में आनन्दित हुआ।

एक और प्रचलित कहानी है। हिरण्यकश्यप ने शुक्ल अष्टमी पर प्रह्लाद को हिरासत में लिया। होलिका प्रह्लाद को नष्ट करने की तैयारी करने लगी। लेकिन, पूर्णिमा के आठवें दिन, वह स्वयं नष्ट हो गई। दुनिया खुशी से झूम उठी और होली मनाई।

ज्योतिष के हिसाब से देखें तो ये आठ दिन हमारे जीवन के अन्य दिनों की तरह ही हैं। अन्य दिनों के मुकाबले ये दिन बेहतर ही होंगे क्योंकि यह दिन शुभ फाल्गुन महीने में आते हैं। किसी भी ठोस तर्क या कारण के अभाव में हम इन आठ दिनों को अशुभ न मानें। अगर हमें चुनना या पक्ष लेना है, तो सकारात्मक को चुनें न कि नकारात्मक को। फाल्गुनी एक पवित्र महीना है। यह स्वयं की प्रेरणा के माध्यम से आत्म-सुधार के लिए एक आदर्श समय है।

कृपया होलाष्टक के दिनों को अशुभ न मानें। यदि हम किन्हीं विश्वासों के कारण इन दिनों कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहते हैं, तो यह हम पर निर्भर है। लेकिन ऐसा करने से होलाष्टक की पूरी अवधारणा की पवित्रता कम नहीं होती।

होलाष्टक के मंत्र:

'रक्षोघ्न मंत्र' होलाष्टक काल के दौरान निर्धारित मंत्रों का समूह है। ये मंत्र ग्रहों की ऊर्जा के बुरे प्रभावों को काटते हैं। परिणामस्वरूप, यह मंत्र सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति में सहायता करते हैं। ऋग्वेद मंडल 4 और 10 और यजुर्वेद में इन मंत्रों का वर्णन है।

होलाष्टक कब से लग रहे हैं?

भारतीय कैलेंडर में होली 2022 तारीख 18-मार्च-2022 को है। तो, होलाष्टक 2022, 10-मार्च, 2:57 AM से शुरू होते हैं और यह होली पर समाप्त होते हैं जो 18-मार्च को है।

आइए हम होलाष्टक प्रारंभ के समय राशिफल देखें। ये आठ दिन शनि की प्रत्यन्तर्दशा में हैं। शनि अपने स्वयं के घर - द्वितीय भाव में स्थित है। यहां से, यह मीन राशि जो चौथा भाव सुख का है, उस घर को दृढ़ता से देखता है। यह कर्क को भी देखता है जो आध्यात्मिक प्रगति का आठवां घर है। और तुला पर भी गृह-दृष्टि पड़ती है शनि की जो हमारे जीवन में लाभ और संबंधों का ग्यारहवां घर है।

The image represents date, time, place and panchanga points on the start of Holashtak days. This is part of an article on Holashtak 2022 written by Anish Prasad and published at
The image represents an horoscope casted on the start of Holashtak days. This is part of an article on Holashtak 2022 written by Anish Prasad and published at

इस समय शनि धनिष्ठा नक्षत्र में है। आइए इन पवित्र दिनों का स्वागत धनिष्ठा नक्षत्र सूत्रम् से करें। होली तक प्रतिदिन धनिष्ठा नक्षत्र सूत्र के 21 मंत्रों का श्रवण करना अत्यंत शुभ रहेगा। होलाष्टक में जरूर करें ये काम। मंत्रों को सुनना या जप करना बहुत ही सरल प्रक्रिया है। इसमें कोई जटिलताएं शामिल नहीं हैं।

आइए होलाष्टक के दौरान अपने व्यक्तित्व की एक कमज़ोरी को पहचानें और उस पर विचार करें। हम स्वयं का एक बेहतर संस्करण बनें और समाज और दुनिया को लाभान्वित करें।

🙏 ऊँ तत् सत् 🙏

अनीश प्रसाद

 इस तस्वीर में रैशनलएस्ट्रो का लोगो दिखाया गया है। लिखा है “ज्योतिष भविष्यवाणी करने से कहीं अधिक है। यह भविष्य को संभव बनाने के बारे में है”. यह आर्टिकल रैशनलएस्ट्रो पर अनीश प्रसाद द्वारा लिखा गया है

रैशनलएस्ट्रो ज्योतिष के माध्यम से जीवन के प्रति सकारात्मक, तर्कसंगत और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का प्रचार करता है। 😊 कृपया परिवार से जुड़कर इसे शक्ति दें 🙏🏻

सब्सक्राईब करें

Podcasts 🔊
The Podcast is about the monthly article that is published on this Substack. Listening to the subject matter of the article gives a different perspective of that topic 😊